अबूधाबी के क्राउन प्रिंस और संयुक्त अरब अमीरात आर्म्ड फ़ोर्सेज के डिप्टी कमांडर शेख मोहम्मद बिन ज़ाएद अल नाह्यान सोमवार को एक बच्ची के घर जाने के लिए मजबूर हो गए.
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान संयुक्त अरब अमीरात के दौरे पर हैं और इसी दौरे में एक कार्यक्रम के दौरान दोनों नेता बच्चियों से मिल रहे थे.
बच्चियां दोनों तरफ़ क़तार में दोनों मुल्कों के झंडे लिए खड़ी थीं. एक तरफ़ की बच्चियों से सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान हाथ मिला रहे थे और दूसरी लाइन की बच्चियों से अबूधाबी के क्राउन प्रिंस ज़ाएद अल नाह्यान.
इसी दौरान सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की लाइन से भागकर एक बच्ची अल नाह्यान की लाइन में उनसे हाथ मिलाने आ गई.
अल नाह्यान जैसे ही उस बच्ची के क़रीब आए उस बच्ची ने उसका अपना हाथ उनकी तरफ़ बढ़ाया लेकिन अबूधाबी के क्राउन प्रिंस बिना देखे ही आगे बढ़ गए.
बच्ची इससे बेहद निराश हो गई. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और बाद में अल नाह्यान उस बच्ची के घर गए और उससे मिले.
अल नाह्यान आयशा मोहम्मद मशहीत अल मज़रोई के घर गए और परिवार वालों से भी बात की.
यूएई में अल नाह्यान के उस बच्ची से मिलने का वीडियो भी वायरल हो गया. इस मुलाक़ात की तस्वीरें अबूधाबी के क्राउन प्रिंस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी पोस्ट की गई है.
सात साल पहले की घटना को कुरेदने पर वो जैसे अतीत में लौट जाती हैं, "मेरा भाई मड़कम रामविलास 15 साल का था. दौड़ने में उसका कोई मुकाबला नहीं था. गांव की पगडंडियों पर ऐसे दौड़ता था जैसे उड़ रहा हो."
रत्ना अपने भाई को याद करके बताती हैं कि कैसे उसका भाई गर्मी की छुट्टियों में भी पढ़ाई करता रहता था और स्कूल में सबसे अधिक नंबर लाता था.
वे कहती हैं, "पढ़ने-लिखने में ब्रिलियेंट था वो. वकील बनना चाहता था. लेकिन पुलिस ने मेरे भाई को मार डाला."
मड़कम रत्ना छत्तीसगढ़ के बीजापुर ज़िले के उन लोगों में शामिल हैं, जिनके परिजन 28-29 जून 2012 की रात सीआरपीएफ़ और सुरक्षाबलों के हमले में मारे गये थे.
No comments:
Post a Comment